प्रभु प्रेमियों ! महर्षि मेँहीँ साहित्य सीरीज की आठवीं पुस्तक "भावार्थ सहित घट रामायण-पदावली" है । इस पुस्तक में सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज संत तुलसी साहब जीवनी और योगात्मक वाणी को भावार्थ सहित बताते हुए कहते हैं कि संत तुलसी साहब की जीवन-वृत्त और घट रामायण की वाणी के बारे में बहुत तरह की मनगढंत और भ्रामक विचार सुनने में आया तो उसकी यथार्थता ज्ञात कर "भावार्थ सहित घट रामायण-पदावली" के रूप में प्रकाशित किया गया है। इसमें साहेब जी के साधनात्मक और आध्यात्मिक वाणी और उसके भावार्थ और व्याख्या भी है। इस पुस्तक के पाठ करके साहेब जी के साधनात्मक अनुभव से आप परिचित होगें। तथा उनकी जीवनी के बारे में भी यथार्थ ज्ञान प्राप्त करेंगे। आइये इस पुस्तक का दर्शन करें-
महर्षि मेँहीँ साहित्य सीरीज की दसवीं पुस्तक "ईश्वर का स्वरूप और उसकी प्राप्ति" के बारे में जानने के लिए 👉 यहां दवाएँ।
भावार्थ सहित घट रामायण-पदावली
भावार्थ सहित घट रामायण-पदावली की भूमिका से
प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज संत तुलसी साहब जी के यथार्थ जीवनी का अथक प्रयासों से पता लगा कर "भावार्थ सहित घट रामायण-पदावली" की भूमिका में लिखा है और उनकी योगाभ्यास संबंधित वाणीयों सहित उसके यथार्थ भावार्थ और व्याख्या लिखकर जन समाज में फैले भ्रम का निवारण और योगाभ्यास के सही स्वरूप को भी जनाया है। आइये इसे अच्छी तरह समझें। घट रामायण नाम की पुस्तक मुझको संतमत सत्संग में सम्मिलित होने पर मिली। इसके रचयिता हाथरस में रहनेवाले संत शिरोमणि तुलसी साहब हैं, ऐसा जानने में आया। परन्तु पुस्तक के पढ़ने पर मुझको बोध हुआ कि यद्यपि तुलसी साहब के सदृश परम संत के बहुमूल्य पद्य बहुत हैं, तथापि अन्यों के बीच उन बहुमूल्य पद्यों के अतिरिक्त और अधिक पद्य पुस्तक में अवश्य हैं, जो तुलसी साहब की रचना नहीं मानने योग्य है। इसका विचार मैं इस भूमिका में लिख दिया हूँ और परम संत तुलसी साहब के भी विषय में लिख दिया हूँ कि वे कौन थे? ग्रंथ के अंदर जो मिथ्या और अयुक्त बातें मुझे मालूम हुईं, मैं बातों को उन परम संत की नहीं मानता हूँ। परम प्रभु सर्वेश्वर को मनुष्य अपने घट में कहाँ और कैसे पा सकता है, यह विषय घट रामायण में अत्यन्त उत्तमता से लिखा हुआ है। इसके अतिरिक्त घट-संबंधी और अनेक बातें इसमें लिखी हुई हैं। पर इसकी मुख्य बात घट में परम प्रभु के पाने का सरल भेद ही है। घट रामायण में यह भेद ऐसा सरल बतलाया गया है कि जिसके द्वारा अभ्यास करने से अभ्यासी को अभ्यास के कारण शारीरिक कष्ट और रोगादि होने की कोई खटक नहीं होती है और गृही तथा वैरागी सब मनुष्य सरलतापूर्वक इसका अभ्यास कर सकते हैं। इसमें शरीर से नहीं केवल सुरत से अभ्यास करने का भक्तिमय भेद लिखा हुआ है। परम प्रभु सर्वेश्वर से मिलने के भक्तिमय भेद की यह एक अनुपम पुस्तक है। इसमें भक्ति करने की अत्यन्त आवश्यकता बतलाकर बाहरी और अन्तरी दोनों भक्तियों का वर्णन है ।
बिशेष-- प्रभु प्रेमियों ! उपरोक्त लिंक में से कहीं भी किसी प्रकार का पुस्तक खरीदने में दिक्कत हो, तो हमारे व्हाट्सएप नंबर 7547006282 पर मैसेज करें. इससे आप विदेशों में भी पुस्तक मंगा पाएंगे. कृपया कॉल भारतीय समयानुसार दिन के 12:00 से 2:00 बजे के बीच में ही हिंदी भाषा में करें.
प्रभु प्रेमियों ! इस पुस्तक के बारे में इतनी अच्छी जानकारी प्राप्त करने के बाद हमें विश्वास है कि आप इस पुस्तक को अवश्य खरीद कर आपने मोक्ष मार्ग के अनेक कठिनाईयों को दूर करने वाला एक सबल सहायक प्राप्त करेंगे.घाट रामायण क्या है? घाट रामायण के लेखक कौन हैं? संत तुलसी साहिब के गुरु कौन थे? घाट रामायण की चौपाई की छवि, घाट रामायण की चौपाई, जय गुरुदेव की घाट रामायण, तुलसी साहिब मस्जिद वाले की घाट रामायण, घट रामायण पीडीएफ), घाट रामायण के रचयिता, आदि बातें। इस बात की जानकारी अपने इष्ट मित्रों को भी दे दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें और आप इस ब्लॉग वेबसाइट को अवश्य सब्सक्राइब करें. जिससे आपको आने वाले पोस्ट की सूचना निशुल्क मिलती रहे और आप मोक्ष मार्ग पर होने वाले विभिन्न तरह के परेशानियों को दूर करने में एक और सहायक प्राप्त कर सके. नीचे के वीडियो में सत्संग योग चारो भाग के बारे में और कुछ जानकारी दी गई है . उसे भी अवश्य देख लें. फिर मिलते हैं दूसरे प्रसंग के दूसरे पोस्ट में . जय गुरु महाराज
MS12 . सत्संग-सुधा , प्रथम भाग- महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज द्वारा दिए गए १८ महत्वपूर्ण प्रवचनों का संग्रह है, जिसे संतमत की एक किताब के रूप में अखिल भारतीय संतमत सत्संग प्रकाशन ने प्रकाशित किया है; यह आध्यात्मिक प्रवचन, भक्ति और गुरु की शिक्षाओं पर केंद्रित है, जिसमें भक्ति के गुण, स्वभाव, और जीवन-मृत्यु से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं. । इसका प्रथम प्रकाशन 1954 ई0 में हुआ था। इसके प्रकाशन का मुख्य लक्ष्य यह है कि भक्तों को आध्यात्मिक मार्ग पर मार्गदर्शन देना और गुरु की शिक्षाओं से जोड़ना । यह पुस्तक उन साधकों के लिए महत्वपूर्ण है जो संतमत और सद्गुरु महर्षि मेँहीँ जी की शिक्षाओं को समझना चाहते हैं, खासकर भक्ति और आत्म-साधना के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं। लोग इन साधनाओं को करके आप अपना इहलोक और परलोक के जीवन को सुखमय बना सकते हैं । जिन लोगों ने इसका अनुसरण किया वे धन्य धन्य हो रहे हैं । ( और जाने )
सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की पुस्तकें निःशुल्क प्राप्त करने की शर्तें की जानकारी के लिए 👉 यहाँ दवाएँ।
---×---
MS11 भावार्थ सहित घट रामायण-पदावली || संत तुलसी साहब जीवनी और योगात्मक वाणी भावार्थ सहित
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
जुलाई 05, 2023
Rating: 5
कोई टिप्पणी नहीं:
जय गुरु महाराज कृपया इस ब्लॉग के मर्यादा या मैटर के अनुसार ही टिप्पणी करेंगे, तो उसमें आपका बड़प्पन होगा।
कोई टिप्पणी नहीं:
जय गुरु महाराज कृपया इस ब्लॉग के मर्यादा या मैटर के अनुसार ही टिप्पणी करेंगे, तो उसमें आपका बड़प्पन होगा।