प्रभु प्रेमियों ! 'महर्षि मेँहीँ साहित्य सूची' की तेरहवीं पुस्तक "सत्संग- सुधा भाग 2" है । इस पुस्तक में सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के 18 प्रवचन हैं। इन प्रवचनों में मानव-जीवन के सर्वांगीण और पूर्ण विकास तथा कल्याण के लिए ईश्वर भक्ति या अध्यात्म-ज्ञान की अनिवार्य आवश्यकता है। वेदों, उपनिषदों, गीता, सन्तवाणियों में सदा से ईश्वर - स्वरूप, उसके साक्षात्कार करने की सयुक्ति एवं अनिवार्य सदाचार- पालन के निर्देश बिल्कुल एक ही हैं, केवल भाषा, शैली और शब्द-योजनाओं का ही उनमें भेद हैं- - तथ्य और अर्थ सभी के साररूप में एक ही हैं। ऐसा बताया गया है। आइये इस पुस्तक का अवलोकन करते हैं--
महर्षि मेँहीँ साहित्य सीरीज की बारहवीं पुस्तक "MS12 सत्संग- सुधा भाग 1 || 18 प्रवचनों में विंदु ध्यान और नाद ध्यान सहित व्यवहारिक ज्ञान भी है" के बारे में जानने के लिए👉 यहां दबाएं।
सत्संग-सुधा भाग 2
वेद-उपनिषद्, गीता-रामायण एवं सन्तवाणी सम्मत ईश्वर-भक्ति, सदाचार आदि का वर्णन
प्रभु प्रेमियों ! 60 वर्षों से बिंदु-नाद की साधना करते हुए संत- साहित्य के प्रमाणों के आधार पर सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज ने अपने अट्ठारह प्रवचनों में सत्संग, ध्यान, ईश्वर, सद्गुरु, सदाचार एवं संसार में रहने की कला के बारे में बताये हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि वेद-उपनिषद एवं संत- साहित्य में वर्णित बातें बिल्कुल सत्य हैं और जांचने पर प्रत्यक्ष है। लोग इन साधनाओं को करके अपना इहलोक और परलोक के जीवन को सुखमय बना सकते हैं । जिन लोगों ने इसका अनुसरण किया वे धन्य धन्य हो रहे हैं । आप भी पीछे न रहे पढ़िये इन प्रवचनों को और अपने जीवन को धन्य-धन्य बनाइये।
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MS14 . सत्संग-सुधा, तृतीय भाग, - इसका प्रथम प्रकाशन 2004 ई0 में हुआ था। इसमें गुरु महाराज जी के 24 प्रवचनों का संकलन है। इन प्रवचनों में मानव-जीवन के सर्वांगीण और पूर्ण विकास तथा कल्याण के लिए ईश्वर भक्ति या अध्यात्म-ज्ञान की अनिवार्य आवश्यकता है। वेदों, उपनिषदों, गीता, सन्तवाणियों में सदा से ईश्वर - स्वरूप, उसके साक्षात्कार करने की सयुक्ति एवं अनिवार्य सदाचार- पालन के निर्देश बिल्कुल एक ही हैं, केवल भाषा, शैली और शब्द-योजनाओं का ही उनमें भेद हैं- - तथ्य और अर्थ सभी के साररूप में एक ही हैं। ऐसा बताया गया है। यह आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला है। जिसमें वेद, उपनिषद, गीता, रामायण और संत-वाणी के आधार पर ईश्वर-भक्ति, सदाचार, आत्म-बल, और जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं पर गहन चर्चा हुुई हैै। जिसमें माया से मुक्ति और आंतरिक शुद्धि (दिल की सफाई) पर जोर दिया गया है। ( और जाने )
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MS13 सत्संग- सुधा भाग 2 || वेद-उपनिषद्, गीता-रामायण एवं सन्तवाणी सम्मत ईश्वर-भक्ति, सदाचार आदि का वर्णन
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
जुलाई 11, 2023
Rating: 5
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