LS16 अनमोल वचन || १,००८ सूक्तियों में सामाजिक व्यवहार, नीति, मनोविज्ञान और मोक्ष-धर्म आदि विषयों का विवेचन
LS17 अनमोल वचन
प्रभु प्रेमियों ! लालदास साहित्य सीरीज के 17 वीं पुस्तक "अनमोल वचन" है. इसमें १,००८ सूक्तियों का संकलन किया गया है। ये सूक्तियाँ शुच्याचार, शिष्टाचार, सामाजिक व्यवहार, नीति, मनोविज्ञान, सत्य नियम, अध्यात्म-ज्ञान और मोक्ष-धर्म आदि विषयों से संबंध रखती हैं। इस पुस्तक में चार साधनों से प्राप्त बातें हो सकती हैं; जैसे समाज में देखी हुई, पुस्तकों में पढ़ी हुई, किसी से सुनी हुई और स्वयं विचारी हुई या स्वयं अनुभव की हुई। पुस्तक में जो भी आचरण में उतारने के योग्य बातें आयी हैं । आइए इस पुस्तक के बारे में जानकारी प्राप्त करें--
१,००८ सूक्तियों में सामाजिक व्यवहार, नीति, मनोविज्ञान और मोक्ष-धर्म आदि विषयों का विवेचन
प्रभु प्रेमियों ! 'अनमोल वचन' पुस्तक के संपादक इस पुस्तक के लेखक के शब्द में लिखते हैं- "‘अनमोल वचन' मेरी स्वतःस्फूर्त सूक्तियों की पुस्तक है। इसमें १,००८ सूक्तियों का संकलन किया गया है। ये सूक्तियाँ शुच्याचार, शिष्टाचार, सामाजिक व्यवहार, नीति, मनोविज्ञान, सत्य नियम, अध्यात्म-ज्ञान और मोक्ष-धर्म आदि विषयों से संबंध रखती हैं। इस पुस्तक में चार साधनों से प्राप्त बातें हो सकती हैं; जैसे समाज में देखी हुई, पुस्तकों में पढ़ी हुई, किसी से सुनी हुई और स्वयं विचारी हुई या स्वयं अनुभव की हुई। मैंने यह पुस्तक इसलिए छपवायी कि यह भविष्य में मेरा और इसे पढ़नेवाले दूसरे कल्याणकामी लोगों का भी मार्ग प्रदर्शन कर सके। यदि इस पुस्तक से पाठकों को कुछ भी लाभ पहुँच सका, तो मैं अपना श्रम सार्थक समझँगा ।
पुस्तक में जो भी आचरण में उतारने के योग्य बातें आयी हैं, मेरा दावा नहीं है कि मैं उन्हें तत्परता के साथ अपने जीवन में उतार लिया करता हूँ। हाँ, मैं उन्हें यथासंभव उतारने का प्रयास अवश्य कर रहा हूँ। पुस्तक के वचनों को कई दशकों में बाँटकर संकलित किया गया है। वे वचन विषयबद्ध नहीं किये जा सके हैं।
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लालदास साहित्य सीरीज की अगली पुस्तक LS17
प्रभु प्रेमियों ! लालदास साहित्य सीरीज की अगली पुस्तक LS17 . महर्षि मँहीँ के प्रिय भजन' है। यदि किन्हीं को यह जानने की इच्छा हो कि सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंसजी महाराज को कौन-कौन-सी संतवाणी बेहद पसंद थी, तो उन्हें 'महर्षि मेँहीँ के प्रिय भजन' नाम्नी इस पुस्तक का अवश्य अवलोकन करना चाहिए। इस पुस्तक में सद्गुरु महर्षि मेँहीँ के १३१ प्रिय भजनों का संकलन किया गया है। ये सारे भजन उन्हें कंठस्थ थे। इनमें से कुछ को मैंने रात्रिकालीन सत्संग में उन्हें गाते हुए सुना था और कुछ को वे अपने प्रवचन में प्रायः उद्धृत किया करते थे। इस पुस्तक के बारे में विशेष जानकारी के लिए 👉 यहां दबाएं .
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Reviewed by सत्संग ध्यान
on
नवंबर 08, 2022
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