प्रभु प्रेमियों ! गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ- 131 रंगीन + 9 ब्लैक चित्र, गुरुसेवी बाबा के जीवनी, महत्वपूर्ण घटनाएं, महापुरुषों के संस्मरण, संतमत साधना की संपूर्ण व्याख्या और प्रवचनों सहित संग्रहनीय ग्रंथ । अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के महामंत्री आदरणीय सम्माननीय श्री 'अरुण कुमार अग्रवाल' जी ने "गुरुसेवी स्वामी भगीरथ अभिनंदन ग्रंथ" की प्रकाशकीय में लिखते हैं- "सत संतन की सत युक्ति यही , यहि से भवबंधन दूर सही ।होता ' मेँहीँ ' शंका न रही , सत सत्य कहा सत सन्तों ने ॥ सभी संतों के सार विचारों को लेकर इसे अपनी साधन - तुला पर रख - परख ' समझा मँहाँ लखा नमूना ' की स्थिति में इनमें समन्वय दशति हुए समाज को सही राह पर चलने की प्रेरणा देने हेतु सदाचार व सत्संग - साधना के प्रचार - प्रसार के लिए संत महर्षि मँहीँ परमहंसजी ने ' संतमत ' को एक संस्थागत सांगठनिक रूप दिया और अपनी कृपा - छाया में सृष्टि के समस्त संतों की एकात्म विचारधारा धरा पर ' अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा ' नाम्नी एक संस्था का संस्थापन किया ।
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गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ
गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ की बातें-
प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान संत सद्गुरु महर्षि मँहीँ परमहंसजी महाराज के निज सेवक शिष्य गुरुसेवी स्वामी भगीरथजी महाराज हुए हैं , जिन्होंने अपने गुरु की सन् 1968 ई ० से 1986 ई ० ( संत महर्षि मँहीँ के परिनिर्वाण ) तक अहर्निश सेवा कर , नितांत निजी सेवा कर गुरु - सेवा के क्षेत्र में एक कीर्तिमान स्थापित किया । परमाराध्य गुरुदेव इन्हें ' बेटा ' कहकर बुलाते थे तथा गुरुदेव ने इन्हें अनेक अमोघ आशीर्वादों से आप्लावित किया है । इनकी अहर्निश गुरु - सेवा के कारण ही संतमत - जगत् इन्हें ‘ गुरुसेवी ' के नाम से जानता , पहचानता और मानता है । महर्षि मँहीँ आश्रम , कुप्पाघाट , भागलपुर ( बिहार ) में साधना - सिद्ध संत सद्गुरु के सान्निध्य में सत्संग - सुधा का पान कर अपनी गुह्य गुरु - ज्ञान- क्षुधा को करनेवाले गुरुसेवी स्वामी भगीरथजी महाराज आज स्वयं इस गुरु - आश्रम की आध्यात्मिक शोभा में अपनी आत्मीय आभा बिखेरकर चार चाँद लगा रहे हैं । इनकी गुरु - सेवा , साधना , संतमत - सत्संग - सेवा और समयनिष्ठा सराहनीय और अनुकरणीय है । अपने सद्गुरु के ' संतमत - सत्संग सुधा - घट ' को अपने सिर पर लिये गुरुसेवी स्वामी भगीरथजी महाराज अनवरत संसार को शाश्वत सुख और शान्ति का सात्त्विक - संदेश संचारित कर रहे हैं संतमत - सत्संग के एक दृढ़ स्तंभ के रूप में इनका योगदान अनिर्वचनीय और अविस्मरणीय है ऐसे महान गुरुसेवक गुरुसेवी स्वामी भगीरथजी महाराज के अपने जीवन के 75 वें वर्ष के उपलक्ष्य में संतमत सत्संग में उनके अमूल्य योगदान को दृष्टिगत रखते हुए तथा संतमत सत्संग के महान आचार्य संत सद्गुरु महर्षि मँहीँ परमहंसजी महाराज के ' निज - सेवक ' के रूप में इनकी गुरुतर गुरु - सेवा के लिए श्रद्धालु सत्संगियों की ओर से अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के द्वारा इनके सम्मान में ' गुरुसेवी स्वामी भगीरथ अभिनन्दन - ग्रंथ ' का प्रकाशन किया जा रहा है । इनकी 75 वीं जयन्ती के शुभ अवसर पर इनके उस गले में , जिनसे लिपटकर पूज्य गुरुदेव इनकी गोद में चला करते थे , अभिनन्दनग्रंथ रूपी हार समर्पित कर हमें अप्रतिम आनंद व गौरव का अनुभव हो रहा है । इस महान कार्य में महती योगदान देने हेतु समस्त श्रद्धालु सत्संगियों , पादकीय सलाहकारों , प्रबंधकों एवं संपादक - मंडल को महासभा धन्यवाद ज्ञापित करती है और गुरुदेव से प्रार्थना करती है । कि ऐसे गुरुसेवक संत गुरुसेवी स्वामी भगीरथ महाराज को लंबी स्वस्थ आयु प्रदान करें , ताकि सतमत - सत्संग के प्रचार का संचार इनक द्वारा अनवरत होता रहे और जगत् लाभान्वित हो । पूज्य गुरुसेवी बाबा की 75 वीं जयन्ती वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर इन्हें महासभा की ओर से अनन्त शुभकामनाएँ । जय गुरु !" ---अरुण कुमार अग्रवाल
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प्रभु प्रेमियों ! पूज्यपाद गुरुसेवी भगीरथ साहित्य सीरीज की अगली पुस्तक OS02. 'योग-संगीत' है। यह पुस्तक योगीराज श्री श्यामाचरण लाहिड़ी जी महाराज के महान शिष्य योगाचार्य पंडित पंचानन भट्राचार्य कृत 'योग-संगीत' जो की बंगाला भाषा में है उसी का भारती (हिन्दी) भाषा में लिप्यंतरण किया गया है। जिससे बंगाला भाषा में संतों का ज्ञान एवं भारती (हिन्दी) भाषा में संतों का ज्ञान का एकत्व का बोध कर आत्मकल्याण कर सके। इस चित्र के बारे में विशेष जानकारी के लिए 👉 यहां दबाएं ।
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OS02 गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ || 131 रंगीन + 9 ब्लैक चित्रयुक्त संम्पूर्ण जीवन चरित
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
नवंबर 11, 2021
Rating: 5
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