ईश्वर का स्वरूप
प्रभु प्रेमियों ! ईश्वर स्वरूप को ठीक से समझे बिना जीवनभर सुख शान्ति के लिए ईश्वर भक्ति के नाम पर किया जानेवाला सारा श्रम निष्फल ही चला जाता है । नावं न जानै गाँव का , कहो कहाँ को जाँव । चलते चलते जुग गया , पाँव कोस पर गाँव ॥ ( संत कबीर साहब )
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प्रभु प्रेमियों ! इस पुस्तक के बारे में इतनी अच्छी जानकारी प्राप्त करने के बाद हमें विश्वास है कि आप इस पुस्तक को अवश्य खरीद कर आपने मोक्ष मार्ग के अनेक कठिनाईयों को दूर करने वाला एक सबल सहायक प्राप्त करेंगे. ईश्वर कौन है और कहां है?क्या ईश्वर सच में है?वेदों में ईश्वर का वर्णित स्वरूप क्या है?क्या ईश्वर एक है?ईश्वर की प्राप्ति आसानी से नहीं होती,ईश्वर की प्राप्ति के लिए करना होगा,ईश्वर प्राप्ति मंत्र,परमात्मा प्राप्ति मंत्र,कलयुग में भगवान को कैसे प्राप्त करें ईश्वर, इस बात की जानकारी अपने इष्ट मित्रों को भी दे दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें और आप इस ब्लॉग वेबसाइट को अवश्य सब्सक्राइब करें. जिससे आपको आने वाले पोस्ट की सूचना निशुल्क मिलती रहे और आप मोक्ष मार्ग पर होने वाले विभिन्न तरह के परेशानियों को दूर करने में एक और सहायक प्राप्त कर सके. नीचे के वीडियो में सत्संग योग चारो भाग के बारे में और कुछ जानकारी दी गई है . उसे भी अवश्य देख लें. फिर मिलते हैं दूसरे प्रसंग के दूसरे पोस्ट में . जय गुरु महाराज
| घटरामायण-पदावली |
MS11 . भावार्थ-सहित घटरामायण- पदावली- संत तुलसी साहब द्वारा रचित एक आध्यात्मिक ग्रंथ है, जो शरीर (घट) के भीतर परम प्रभु को खोजने के रहस्य (सुरत/ध्यान) पर केंद्रित है; यह पुस्तक बाहरी आडंबरों से दूर, केवल सुरत के द्वारा भीतर ही भीतर भक्ति और परमात्मा से मिलने का सरल, सुगम मार्ग बताती है, जिसमें शारीरिक कष्ट या रोगादि की चिंता नहीं होती और गृहस्थ व त्यागी, दोनों इसका अभ्यास कर सकते हैं। 'भावार्थ-सहित घटरामायण-पदावली' में सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज संत तुलसी साहब की पुस्तक ‘घटरामायण’ के 7 छन्दों, 3 सोरठों, 3 चौपाइयों, एक दोहे और एक आरती का भावार्थ दिया गया है। इसका प्रकाशन सर्वप्रथम 1935 ई0 में हुआ था। यह पुस्तक परम प्रभु से मिलने के भक्तिमय भेद की एक अनुपम रचना है, जो आडंबरों से परे है। यह ग्रंथ परमेश्वर को घट (शरीर) में पाने के सरल भेद को बताता है। यह सरल और सहज साधना का मार्ग दिखाती है, जो सभी के लिए सुलभ है। यह पुस्तक शरीर रूपी मंदिर में ही ईश्वर को पाने का एक आंतरिक, सहज और भक्तिपूर्ण आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। ( और जाने )
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