संतवाणी सटीक
प्रभु प्रेमियों ! संतों का अनुभव योग - समाधि का अनुभव है , जो योग - अभ्यास की अन्तिम प्रत्यक्षता है, न कि केवल सोच - विचार का साहित्यिक अनुभव ।उनकी वाणी उन्हीं गम्भीरतम अनुभूतियों और सर्वोच्च अनुभव को अभिव्यक्त करने की क्षमता से सम्पन्न और अधिकाधिक समर्थ है । ' संतवाणी सटीक ' में पाठकगण उसी विषय को पाठ कर जानेंगे ।
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संतवाणी सटीक की महत्वपूर्ण बातें
प्रभु प्रेमियों ! संतों ने ज्ञान और योग - युक्त ईश्वर - भक्ति को अपनाया । ईश्वर के प्रति अपना प्रगाढ़ प्रेम अपनी वाणियों में दर्शाया है । उनकी यह प्रेमधारा ज्ञान से सुसंस्कृत तथा सुरत - शब्द के सरलतम योग - अभ्यास से बलवती होकर , प्रखर और प्रबल रूप से बढ़ती हुई अनुभूतियों और अनुभव से एकीभूत हो गई थी , जहाँ उन्हें ईश्वर का साक्षात्कार हुआ और परम मोक्ष प्राप्त हुआ था । उनकी वाणी उन्हीं गम्भीरतम अनुभूतियों और सर्वोच्च अनुभव को अभिव्यक्त करने की क्षमता से सम्पन्न और अधिकाधिक समर्थ है । ' संतवाणी सटीक ' में पाठकगण उसी विषय को पाठ कर जानेंगे ।
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MS07 . महर्षि मेँहीँ-पदावली- संतमत के महान संत महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है। यह पुस्तक मूल रूप से भजनों और पदों का संग्रह है। इसके पदों के शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणियाँ शामिल हैं, ताकि पाठक उनके गहरे अर्थों को आसानी से समझ सकें। इसका रचना-काल 1925 से 1950 ई0 है। यह गुरु महाराज जी की बड़ी लोकप्रिय काव्य-कृति है। इसमें 142 पद हैं। इसके पदों का वर्गीकरण विषय के आधार पर किया गया है। परम प्रभु परमात्मा, सन्तगण और मार्गदर्शक सद्गुरु, इन तीनों को एक ही के तीन रूप समझकर इन तीनों की स्तुति-प्रार्थनाओं को प्रथम वर्ग में स्थान दिया गया है । द्वितीय वर्ग में सन्तमत के सिद्धान्तों का एकत्रीकरण है। तृतीय वर्ग में प्रभु-प्राप्ति के एक ही साधन ‘ध्यान-योग’ का संकलन है, जो मानस जप, मानस ध्यान, दृष्टि-साधन और नादानुसंधान या सुरत-शब्द-योग का अनुक्रमबद्ध संयोजन-सोपान है। चतुर्थ वर्ग में ‘संकीर्त्तन’ नाम देकर तद्भावानुकूल गेय पदों के संचयन का प्रयत्न है। ( और जाने )
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MS06 संतवाणी सटीक ।। 33 सन्तो के ईश्वर-भक्ति, साधना, बंधन-मोक्ष सम्बंधित वचनों का सटीक संग्रह
Reviewed by सत्संग ध्यान
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नवंबर 09, 2021
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